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बुलेट, हाइपरलूप और ५ग के ज़माने में बैलगाड़ी को पकड़े रहेंगे तो यह समय और ज़माने के हिसाब से दो विपरीत स्थियों का निर्माण करेगी

धन प्राप्ति की कामना तो सब लोग करते हैं लेकिन धन मिलता उसी को है, जिस पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है.

धन प्राप्ति के उपाय करके धन की प्राप्ति करते है परंतु उस कमाए हुए धन को टीकाई रखना और निरंतर उसमें वृद्धि करना यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको बताने जा रहा हूं.

धन प्राप्ति के अचूक उपाय और लक्ष्मी को अपने पास स्थायी रूप से टिकाये रखना जॉ महाभारत की एक कथा में है और यह बात शास्त्र संमत भी है. एक दिन माता लक्ष्मी देवराज इंद्र के दरवाजे पर आती है और इंद्र से कहती है. मैं स्वयं यहां पर निवास करना चाहती हूं.

तो इंद्र ने माता लक्ष्मी को बड़े ही आश्चर्य से कहा आप तो असुरों के यहां बहुत आनंद के साथ निवास करती थी, फिर आपको ऐसा क्या कष्ट आन पड़ा कि आपने असुरों को त्याग दिया. मैंने कितनी ही बार आपको यहां लाने के प्रयत्न किए परंतु माते आपने हमारी मिन्नतों का मान नहीं रखा. लेकिन आज बिना बुलाए आप शचीपति ( देव राज इंद्र का एक नाम जिसका मतलब शक्ति शाली ) के द्वार पर पधारे. तो देवी इसका क्या प्रयोजन समझा जाए ?.

हे शतक्रतु ( देवराज इंद्र का एक नाम जिसका मतलब सौ प्रकार की शक्तियों को धारण करने वाला ) कुछ समय पहले दैत्य धर्म, कर्म, श्रम और कर्तव्य मैं मानने वाले थे. लेकिन उनका आचरण समय-समय पर नष्ट होने लगा और सभी प्रकार के सद्गुणों का स्थान दुर्गुणों ने ले लिया है. ऐसे वातावरण में कभी वास नहीं करती. इसलिए है शक्र में देवी लक्ष्मी स्वयं तुम्हारे यहाँ आनंद पूर्वक निवास करने चली आयी क्यूंकि यहाँ धर्म कर्म और सदाचार निवास करते है.

देवी लक्ष्मी ने अपने मुख कमल से कहा है इंद्र मैं उनके यहां कभी बात नहीं करती जो: सत्पुरुषों का उपहास, निंदा और कटु वचन कहकर उनके मन को ठेस पहुंचाते हैं, जो गुरुजनों और अपने से बड़े लोगों का सम्मान नहीं करते. इतना ही नहीं उनका सत्कार, शिष्टाचार और अभिवादन भी नहीं करते. जो हमेशा अनाप-शनाप बोलते हैं. हर किसी पर चिल्लाते रहते हैं. ना तो वह स्वयं शांति से रहते हैं और ना तो दूसरे को रहने देते हैं. बिना वजह ही वाद विवाद करते हैं. समाज को लज्जित करने वाले शब्दों का प्रयोग करते हैं. बिना कार्य करें आनंद से श्रम विहित जीवन जीते हैं. अन्न, पैसे, पानी और चीज़ वास्तुओ का बीना सोचे समझे दूर उपयोग करते हैं. आलस्य के साथ जीवन व्यतीत करते हैं. कोई कार्य नहीं करते और निरर्थक फ़िज़ूल के भोग विलाशिता में जीवन व्यतीत करते है.  और जिनके मन में राग, द्वेष, क्रोध इत्यादि दुर्गुण है वहां सिर्फ दरिद्रता ही निवास करती है.

जो परिश्रमी, कर्तव्य परायण, विचारवान, सदाचारी, संयमी, नियमित, उद्यमी, उद्योगी, धर्म परायण और अपने कर्तव्य और कार्य के प्रति जागरूक मैं वहां हंसी खुशी निवास करना पसंद करती हूं.

Summary: धन को पाना कोई बड़ी बात नहीं परंतु वह धन कौन सा कार्य करके कमाया है यह सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण बात होती है. कमाए हुए धन को बनाये रखना बड़ा ही मुश्किल कार्य हो जाता है क्योंकि लक्ष्मी चंचल है.

” लक्ष्मी वहां पर ही स्थित रहती है : जो अपने कर्तव्य, कार्य, धर्म, सुआचरण और परिवर्तित समय के साथ अपने कार्यों के अंदर भी निरंतर परिवर्तन लाते है “.

बुलेट, हाइपरलूप और ५ग के ज़माने में बैलगाड़ी को पकड़े रहेंगे तो यह समय और ज़माने के हिसाब से दो विपरीत स्थियों का निर्माण करेगी

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