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जानिए कलश स्थापना विधि – घट स्थापना नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में

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जाने घट स्थापना (कलश स्थापना विधि ) नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त, सही वक्त और प्रामाणिक तरीके से करनी चाहिए। आइए जाने कैसे करें घटस्थापना।

नवरात्रि न केवल आनंद उत्सव का त्योहार है, किंतु मां भगवती की आराधना का पर्व भी है। देवी भागवत में कहा गया है, नवरात्रि में मां भगवती के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनुष्य की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कलश स्थापना विधि के रूप में भी भगवती की आराधना की जाती है । किंतु उसके लिए शास्त्रोक्त विधि-विधान का सहारा लेना पड़ता है।

कलश स्थापना विधि
कलश स्थापना विधि के रूप में भी भगवती की आराधना

जैसे कि नवरात्रि में कलश स्थापना विधि करके, नवदुर्गा का आवाहन करना, नवरात्र के दौरान चंडी पाठ का पठन करना या फिर अलौकिक शक्ति के साथ भगवती की कृपा प्राप्ति के लिए जप,पूजा, यज्ञ  करना और अंत में सबसे सरल नवरात्रि के 9 दिनों में भगवती की आराधना करते हुए उपवास व्रत करना। सबसे पहले जानते हैं, नवरात्रि में घट स्थापना किस प्रकार से करते हैं।

 कलश स्थापना विधि का पुजापा
कलश स्थापना विधि का पुजापा

कलश स्थापना विधि के लिए आवश्यक सामग्री :-

  • मिट्टी का पात्र जौ बोने के लिए
  • पवित्र शुद्ध मिट्टी
  • तांबे का कलश या मिट्टी का छोटा  घड़ा
  • तांबे का पूर्ण पात्र या फिर मिट्टी का ढक्कन
  • तज,लविंग,सुपारी
  • गंगाजल
  • ₹1 का सिक्का
  • आम वृक्ष की पूर्ण पत्तियां
  • कच्चे चावल
  • रक्षा सूत्र
  • भीगे हुए जौ (जवारे)
  • अबिल, गुलाल, कुमकुम, चंदन
  • सुगंधित द्रव्य
  • लाल पुष्प और पुष्पमाला
  • नारियल
  • लाल वस्त्र/ मैया के लिए लाल चुन्नी
  • पंचामृत
कलश स्थापना विधि
नवरात्री में कलश स्थापना विधि

कलश स्थापना विधि :-

वैदिक विधि विधान के अनुसार शारदीय नवरात्रि या फिर बसंती नवरात्रि या फिर चैत्र नवरात्रि के शुभ मुहूर्त में देवी देवताओं के आह्वान से पहले कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना पूर्व दिशा की और मुंह रख के की जाती है। अगर पूर्व दिशा की ओर पूजा नहीं कर सकते तो आप उत्तर या फिर पश्चिम दिशा की ओर भी कर सकते हैं।

https://youtu.be/XkE65bZjid0

सबसे पहले मिट्टी के बड़े पात्र में  टिंबे से लाई गई पवित्र मिट्टी को डालें और उसमें भीगे हुए जवारे डाल दें।

अब इस पात्र में दोबारा से हल्के हाथों से थोड़ी मिट्टी डालें और फिर जौ डाले  फिर से मिट्टी को पात्र में डाल कर थोड़ा सा जल डालें।

अब ताम्र कलश या फिर मिट्टी के कलश को तिलक करें और मौली बांध दे।

उसके बाद उस कलश में पवित्र जल के साथ गंगा जल मिलाकर भर दे।

कलश में सुगंधित द्रव्य, सुपारी, रुपया का सिक्का और थोड़े से चावल दाल दे।

अब पूजा की हुए कलश के किनारों पर 5 आम के पत्ते रखें और कलश को कमरे की पूर्ण पात्र या फिर ढक्कन से ढक दें।

फिर नारियल लेकर उसे लाल कपड़े या लाल चुन्नी से लपेट लें। बाद में रक्षा सूत्र से बांधे

श्रीफल को उस कलश के ऊपर रखने से पहले कलश स्थापना का मंत्र बोलें

अब श्रीफल को कलश के ऊपर रख दे। अब तीनों चीजों को हाथों से उतारकर उस मिट्टी का जो वाला पात्र रखा हुआ है उसके ऊपर रख दें। 

घट के ऊपर पुष्प अर्पण करें और  फूल माला भी अर्पण करें। अब उसके ऊपर चावल के दाने छिड़क दें।

प्रिय बंधुओं यहां पर आपकी कलश स्थापना की संपूर्ण विधि पूर्ण हो चुकी है। अब आप  विभिन्न देवी-देवताओं का आवाहन कर कर नवरात्रि का पूजन प्रारंभ कर सकते हैं।

 

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नवरात्रि

नवरात्रि व्रत के नियम

जो व्रत धारण करता है उन्हें दाढ़ी मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए। यहां तक इन दिनों में नाखून भी नहीं काटने चाहिए।

खाने में प्याज और लहसुन का उपयोग ना करें। विशेषकर मांस मदिरा से 9 दिन तक दूरी ही बनाए रखें।

व्रत रखने वाले को 9 दिनों तक बैंगन की सब्जी नहीं खानी चाहिए। यहां तक नींबू नहीं काटना चाहिए।

देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोना निषेध है। हो सके तो दोनों समय फल का आहार लेना चाहिए।

व्रत रखने वाले लोगों को 9 दिनों तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए। इन दिनों पर जमीन पर सोना चाहिए।

प्रिय बंधु नवरात्रि का त्योहार गुप्त एवं चमत्कारी शक्तियां प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ अवसर के रूप में प्राप्त होता है। इन दिनों में यदि आप सही कलश स्थापना विधि  विधान से पूजा पाठ या फिर यज्ञ करते हैं। तो आपको मां भगवती असीम कृपा तो प्राप्त होती है, साथ में आपके जीवन में धन वैभव सुख समृद्धि प्राप्त होती है। पृथ्वी पर जब तक जीवन व्यतीत करते हैं, तब तक वैभवशाली जीवन जीने का सुख प्राप्त होता है।

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