गरीब सेवा

भगवान को पाने के लिए मंदिर जाने या घंटों पूजा-पाठ करने की आवश्यकता नहीं है। भगवान तो गरीबों के हृदय में रहते हैं। गरीब, दीन-दुखियों की सेवा करेंगे तो भगवान का आशीर्वाद जरूर मिलेगा, क्योंकि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। यह बात गुजरात (अहमदाबाद) के प्रसिद्ध भगवताचार्य जयदेव ब्रह्मभट्ट ने सप्तऋषि स्थित कच्छी आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कही।

बुधवार को भगवताचार्य जयदेव ब्रह्मभट्ट ने कहा कि कर्म ही जीवन है। बिना कर्म के मानव नहीं रह सकता। यह कर्म ही जीव के पाप और पुण्य का निर्धारण करते हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा। इसलिए जीव को निष्काम भाव से अपना कर्म करना चाहिए, क्योंकि उसकी ओर से किए गए कर्म ही उसके भाग्य का निर्धारण करते हैं। कहा कि भगवान श्रीहरि भक्त वत्सल हैं।

वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए कोई भी रूप धारण कर लेते हैं। भक्त के बिना भगवान की और भगवान के बिना भक्त की कोई अहमियत नहीं होती है। यह दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। कहा कि जैसा बीज हम बोते हैं, वैसा ही फल प्राप्त होता है।

इसी तरह से जैसे संस्कार हम बच्चों को देते हैं, बच्चे भी वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में जो चढ़ावा आता है, उसे वह दिव्यांग, गरीब, कुष्ठ रोगी पर खर्च करते हैं।